'काव्यं यशसे अर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतर क्षतये ।....' - काव्य प्रयोजन विषयक उपर्युक्त कथन किस आचार्य का है ?

1
आचार्य दण्डी
2
आचार्य मम्मट
3
आचार्य विश्वनाथ
4
आचार्य भामह

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