'हिमाद्रि तुंग-श्रृंग से, प्रबुद्ध-शुद्ध भारती।

स्वयं प्रभा समुज्ज्वला, स्वतंत्रता पुकारती।

अमर्त्य वीर-पुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो।

प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो

इस काव्यांश में निहित काव्य-गुण है-

1
ओज
2
प्रसाद
3
माधुर्य
4
प्रासादान्त

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