निम्नलिखित में से 'काकु वक्रोक्ति' का उदाहरण नहीं है :
1
'बल्लभ' विचारि कै सुनु री सयानी अली।
ऐसे समय नाथ परदेस तें न आएँगे।।
2
भरतभूप सियराम लखन बन सुनि सानन्द सहौंगो।
पुर परिजन अवलोकि मातु सब सुख सन्तोष लहौंगो।।
3
हैं री लाल तेरे? सखी ऐसी निधि पाई कहाँ?
हैं री खगयान? कह्यो हौं तो नहीं पाले हौं?
4
मैं सुकुमारी नाथ बन जोगू।
तुमहिं उचित तप मों कहँ भोगू।।