रस की परिभाषा है:

1
काव्य को देखने या सुनने से जिस आनन्द की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं।
2
काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनन्द की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं।
3
गद्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनन्द की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं।
4
गद्य को देखने या लिखने से जिस आनन्द की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं।

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