हरा भरा है सब पेट जो भरा,
सुनो, नहीं तो बस शून्य है धरा।
लगे हमारे सब काम पेट से,
बचा न कोई इसकी चपेट से।
उक्त पद्यांश में छंद है :
1
मालिनी
2
सवैया
3
वंशस्थ
4
कवित्त
हरा भरा है सब पेट जो भरा,
सुनो, नहीं तो बस शून्य है धरा।
लगे हमारे सब काम पेट से,
बचा न कोई इसकी चपेट से।
उक्त पद्यांश में छंद है :