Comprehension Passage
नारी है शक्ति की अद्भुत परिभाषा,
धैर्य और सौम्यता की जीवंत काशा।
जननी, बहन, मित्र, प्रेमिका, जीवनसाथी,
सदा सजग, करती है हर रोल अभिनीत अपार।
सपनों को वह उड़ान देती, संघर्षों में स्तंभ बन जाती,
अश्रु से सींच कर खुशियों के फूल उगाती।
आत्मसम्मान की दीपशिखा, नारी है अतुल्य,
अन्याय के विरुद्ध में वो चट्टान सी दृढ़ संघर्षशील।
नारी है वीरता और करुणा की संयोजनीय।
'अश्रु से सींच कर खुशियों के फूल उगाती' - इस पंक्ति का भावार्थ क्या है?
1
नारी अपने दुःखों को छिपा लेती है
2
नारी अपने आंसुओं का उपयोग सकारात्मक परिवर्तन के लिए करती है
3
नारी को केवल दुख होते हैं
4
नारी आसानी से हार मान लेती है