Comprehension Passage
नीचे दिए गए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्न के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए ।
जिंदगी जिसके लिए आनंद है, जो हवाओं की तरह स्वच्छंद है।
आत्मा की राह पर जो चल पड़ा, समझ लेना वो विवेकानंद है
बँध सका न वो नगर या गाँव से, वो रुका न धूप से, न छाँव से ।
दिग्भ्रमण का व्रत लिए वो चल पड़ा, मापता था दूरियाँ खुद पाँव से ।
मस्त रहता था मतंगों की तरह, रूप उसका था अनंगों की तरह
रूपसियों ने उसे घेरा मगर, व्यर्थ मँडराई पतंगों की तरह ।
वन गिरि पर्वत कहाँ भटका नहीं, कौन सा था विष जिसे गटका नहीं
पर जिया तो सूर्य के आलोक-सा, दीनता के पास भी फटका नहीं ।
'विष' का इस कवितानुसार क्या अर्थ है?
1
कष्ट
2
अपमान
3
ज़हर
4
प्रदूषण