निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
गुरु ऑल इन वन हैं। चित्रकार, मूर्तिकार, मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार, लोहार जैसी सभी खूबियाँ उनमें समाहित हैं । शिष्य का अज्ञान मिटाने की उनमें अद्भुत शक्ति है । जो लोग गुरु को साधारण व्यक्ति मानते हैं, वे अज्ञानी हैं। गुरु वह है जो तुम्हारे अंधकार को मिटाकर तुम्हें प्रकाश की ओर ले जाए। गुरु का शाब्दिक अर्थ भी देखें तो गु का अर्थ अंधकार और रु का अर्थ है - मिटाने वाला या दूर ले जाने वाला । अंधकार के मिटने पर प्रकाश अपने आप आ जाता है । गुरु को कहीं खोजने की आवश्यकता नहीं है। शिष्य को तो वह स्वयं खोज लेते हैं । ज्ञान की तड़प एक-दूसरे को नजदीक खींच लाती है ।
जैसे ही होनहार शिष्य मिलता है, गुरु का काम शुरू हो जाता है । जैसे कुम्हार मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए उचित मिट्टी तलाशता है, उसे छानता है, मथता है और फिर चाक पर चढ़ा उसे बर्तन का रूप देता है, जैसे चित्रकार के मस्तिष्क में चित्र पहले बनता है, बाद में वह उसी हिसाब से उसे कागज पर रंगों की सहायता से उकेरता है और जैसे मूर्तिकार के मन में पहले मूर्ति आकार लेती है उसके बाद वह मूर्ति बनाता है, ठीक वैसी ही स्थिति गुरु की है । वह शिष्य के अज्ञान के अंधकार को मिटा उसमें ज्ञान का प्रकाश भर अपने जैसा बनाते हैं। गुरु को ईश्वर से ऊँचा दर्जा ऐसे ही नहीं दिया गया। यूं ही नहीं कहा गया कि 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय, बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताय ।'