निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए।
भाषा का मुख्य कार्य सुस्पष्ट अभिव्यक्ति है। यदि सुस्पष्टता एवं निर्दिष्टता से कोई भी भाषा वंचित रहे तो वह भाषा चिरकाल तक जीवित नहीं रह सकती। नये शब्दों के निर्माण में भी यही बात सोचनी चाहिए। इस संदर्भ में यह भी याद रखना चाहिए कि हम पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर उस शब्द की मूल आत्मा तथा सार्थकता पर उन्मुक्त विचार कर सकें। अंग्रेजी भाषा शासकों की भाषा रही और भाव दासता की निशानी है, ऐसा सोचकर यदि हम नये शब्द का निर्माण करने में लग जायें तो नुकसान हमारा ही होगा, अंग्रेजों का नहीं। उर्दू में प्रयुक्त अरबी और फारसी के शब्दों को यदि इस्लाम धर्म को ज्ञापित करने वाले शब्द समझकर हिन्दी वाले त्यागना आरम्भ करें तो हिन्दी भाषा सहज भाषा न रहकर एकदम बनावटी लगेगी।
भाषा का नवीनीकरण, यदि कुछ पंडितों एवं आचार्यों की दिमागी कसरत ही बनी रहे तो भाषा गतिशील नहीं होगी भाषा का सीधा सम्बन्ध प्रयोग से है और जनता से है। यदि नये शब्द अपने उद्गम स्थान में ही अड़े रहें और कहीं भी उनका प्रयोग किया न जाय तो उसके पीछे के उद्देश्य पर ही कुठाराघात होगा। इसके लिए यूरोपीय देशों में प्रेषक के कई माध्यम हैं। श्रव्य - दृश्य विधान, वैज्ञानिक कथा साहित्य आदि । भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक कथा साहित्य नहीं के बराबर है।