नीचे दिए गए गद्यांश को पढकर पूछे गए प्रश्नों के सटीक उत्तर दिजीये।
अपने देश की सीमाओं की दुश्मन से रक्षा करने के लिए मनुष्य सदैव सजग रहा है। प्राचीन काल में युद्ध क्षेत्र सीमित होता था तथा युद्ध धनुष-बाण, तलवार, भाले आदि द्वारा होता था, परंतु आज युद्धक्षेत्र सीमाबद्ध नहीं है। युद्ध में अंधविश्वास से हटकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। आज विज्ञान ने लड़ाई को एक नया मोड़ दिया है। अब हाथी, ऊँट, घोड़ों का स्थान रेल, मोटरगाड़ियों और हवाई जहाजों ने ले लिया है। धनुष-बाण आदि का स्थान बंदूक व तोप की गोलियों और रॉकेट, मिसाइल, परमाणु तथा प्रक्षेपास्त्रों ने ले लिया है और उनके अनुसार राष्ट्र की सीमाओं के प्रहरियों में अंतर आया है।
अब मानव प्रहरियों का स्थान बहुत हद तक यांत्रिक प्रहरियों ने ले लिया है जो मानव से कहीं अधिक सजग, त्रुटिहीन और क्षमतावान् हैं। आधुनिक प्रहरियों में रेडार, सौनार, लौरान, शौरान आदि विशेष उल्लेखनीय हैं। यहाँ रेडार का वर्णन किया जाता है।
रेडार का उपयोग द्वितीय विश्वयुद्ध में प्रारंभ हुआ। ‘रेडार’ शब्द 'रेडियो डिटेक्शन' एंड रेंजिंग के प्रथम अक्षरों से बना है। इसका अर्थ यह भी है कि किसी भी रेडार से एक निश्चित क्षेत्र के अंदर ही वायुयान की स्थिति ज्ञात की जा सकती है।