निर्देश: दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
वर्तमान समय में उपभोक्तावादी संस्कृति का दुर्निवार आकर्षण सबके सिर चढ़कर बोल रहा है। इसने आदमी को अनगिनत इच्छाओं से भर दिया है। वह अपने घर को अटरम-शटरम चीजों का कबाड़खाना बना रहा है। इस बाजारवाद के कारण लोग ऋण लेकर वस्तुएं खरीद रहे है। उपभोक्तावाद का वह नशा न मरने देता है और न जीने। तृष्णाएँ बढ रही है, सरस्वती पलायन कर रही है। गाँव के लोग भी इससे अछूते नहीं है। सड़क के द्वारा मानो बाजार ही गाँव में घुस आया हैं। ग्रामीण भी इन उपभोक्तावादी वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए शहरी साहुकारों के ऋण-जाल में फँसते जा रहे हैं। खेत गिरवी पड़े है। इन्हें देखकर प्रेमचंद के सर्वश्रेष्ठ उपन्यास गोदान का नायक होरी याद आ जाता है। अमेरिका जैसे देश पेट्रोल क्षेत्रों को अपने अधिकार में करके सारी दुनिया को अपने इशारों पर नचाना चाहते हैं। मानव-विनाश के विविध अस्त्रों का संचय हों रहा है, खाने-पीने की चीजें, नदियाँ सभी दूषित है। प्रदूषण बढ़ रहा है।