Comprehension Passage
निर्देश: दिए गए पद्यांश को ध्यानपर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुज नहीं लाया है,
अपना सुख उसने अपने
भुजबल से ही पाया है।
प्रकृति नहीं डर कर झुकती है
कभी भाग्य के बल से,
सदा हारती वह मनुष्य के
उद्यम से, श्रमजल से।
ब्रह्मा का अभिलेख
पढ़ा करते निरुद्यमी प्राणी
धोते वीर कु-अंक भाल का
बहा ध्रुवों से पानी।
भाग्यवाद आवरण पाप का
और शस्त्र शोषण का
जिससे रखता दबा एक जन
भाग दूसरे जन का।
पूछो किसी भाग्यवादी से
यदि विधि-अंक प्रबल है
पद पर क्यों देती न स्वयं
वसुधा निज रतन उगल है?
उपजाता क्यों विभव प्रकृति को
सीच -सीच वह जल से ?
'निरुद्यमी' का विलोम शब्द है-
1
परिश्रम
2
उद्यम
3
उद्यमी
4
व्यवसाय