Comprehension Passage
निर्देश: निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
हमको कुछ ऐसा मालूम होता है कि अपने में आशा की दृढ़ता चाहना ही मनुष्य के _______(1) की प्राकृतिक दशा है। ध्यान देकर सोचिए तो _______(2) की अवस्था मनुष्य के जीवन में केवल क्षणिक है। नैराश्य के भाव मन में उदय होते ही चट्ट आशा का अवलम्बन मिल जाता है। ‘कितने थोड़े समय के लिए आदमी नैराश्य को जी में जगह देता है और कितनी जल्द फिर उसको निकाल कर ________(3) फेंक देता है।’ सिर्फ यही बात इसका पक्का सबूत है कि प्राकृतिक _____(4) मनुष्य का आशा ही में है। आशा ही वह पुष्टई है जिसे खाकर आप जो चाहें वह काम करिए, शिथिलता और आलस्य आपके पास न फटकने पाएगा। क्योंकि यह असंभव है कि आशा मन में हो फिर भी मनुष्य सिर नीचा किए हुए रंज में बैठा रहे। आशा की _______(5) यदि मन में भरी है तो ऐसी कातर दशा आने ही न पाएगी। इससे यदि आशा ही को आदमी की जिंदगी का बड़ा भारी फर्ज मानें तो कुछ अनुचित नहीं है।रिक्त स्थान (4) के लिए उचित शब्द क्या होगा?
1
सुख
2
परोपकार
3
अहित
4
हित