Comprehension Passage

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

पारिस्थितिक तंत्र (इकोसिस्टम) पृथ्वी पर जीवन के संचालन की मूल इकाई है, जो जीवित और निर्जीव तत्वों के बीच अंतरसंबंधों का एक जटिल नेटवर्क है। इसमें जीव (वनस्पति, जीवाणु, फंगी, पशु आदि) एवं उनके वातावरण (जैसे कि मिट्टी, पानी, वायु) शामिल होते हैं। यह संबंध इतने घनिष्ठ होते हैं कि एक घटक में होने वाले परिवर्तन का प्रभाव अक्सर पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ता है।

पारिस्थितिक तंत्र की स्वास्थ्य और क्षमता प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन पर निर्भर करती है। ये प्राकृतिक संसाधन जीवन के लिए अत्यावश्यक होते हैं जैसे कि हवा, पानी, मिट्टी, खाद्य संसाधन जिनका उपयोग पारिस्थितिक तंत्र के जीवित घटक करते हैं। जैसे-जैसे मानव अपने परिवेश को बदलता है, पारिस्थितिक तंत्र पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है।

मनुष्य द्वारा किए गए अवांछित परिवर्तन जैसे कि वनों की कटाई, उद्योगीकरण, शहरीकरण, और प्रदूषण पारिस्थितिकीय संतुलन को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं। जैव विविधता की हानि, जलवायु परिवर्तन, विरल प्रजातियों का खत्म होना, और पारिस्थितिक तंत्र के अक्षम होने के परिणामस्वरूप मानव समेत सभी प्राणियों के लिए जीवन का खतरा उत्पन्न हो रहा है।

प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करने के लिए, सतत विकास की अवधारणा को अपनाना अत्यावश्यक है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पुनर्चक्रण और संवर्धन शामिल है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पारिस्थितिक तंत्र की स्थिरता बनी रहे। अधिक से अधिक हरित ऊर्जा का उपयोग, वनीकरण, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण जैसे उपायों से हम पारिस्थितिक तंत्र को स्वस्थ और संतुलित रख सकते हैं।

अंततः, पारिस्थितिक तंत्र की समझ और संरक्षण में हमारी सहभागिता पृथ्वी पर जीवन के भविष्य को सुनिश्चित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है। हमें इसे हर स्तर पर - वैयक्तिक, सामाजिक, और सरकारी - प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है ताकि पृथ्वी एक स्थायी और समृद्ध ग्रह के रूप में बनी रहे।

पारिस्थितिक तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव का कारण क्या है?

1
हरित ऊर्जा का उपयोग
2
वनीकरण
3
उद्योगीकरण और शहरीकरण
4
जल संरक्षण

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