"धूम, साम, धौरे धन घाए। सेत धजा बग-पाँति देखाए।।
खड़ग बीजू चमकै चहूँ ओरा। बूँद-बान बरसहिं घन घोरा।।
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जिन्ह घर कंता ते सुखी, तिन्ह गारौ औ गर्व।
कंत पियारा बाहिरै, हम सुख भूला सर्ब।।
उपर्युक्त पंक्तियों में बारहमासा के किस समय का वर्णन कवि ने किया है?
1
कार्तिक
2
आषाढ़
3
भादो
4
सावन