Comprehension Passage

नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

धीरे-धीरे फिर बढ़ा चरण,

बाल्य की केलियों का प्राङ्गण

कर पार, कुञ्ज-तारुण्य सुघर

आयी, लावण्य-भार थर-थर

काँपा कोमलता पर सस्वर

ज्यों मालकौश नव वीणा परः

नैश स्वप्न ज्यों तू मन्द-मन्द

फूटी ऊषा जागरण-छन्द,

काँपी भर निज आलोक-भार,

काँँपा वन, काँपा दिक प्रसार।

परिचय-परिचय पर खिला सकल–

नभ, पृथ्वी, द्रुम, कलि, किसलय-दल।

'किसलय' का अर्थ होता है।

1
सुमन
2
नवपल्लव
3
पराग
4
फल

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