'प्रजानामेव भूत्यर्थ स ताभ्यो बलिमग्रहीत्।' अस्य श्लोकांशस्य शुद्धः अनुवादः अस्ति
1
वह (राजा दिलीप) प्रजाओं के कल्याण के लिए ही उनसे कर लेता था।
2
वह प्रजा की भलाई के लिए उन पर टैक्स लगाता था।
3
वह प्रजाजन से बलि प्राप्त करता था और उनका भला करता था।
4
वह प्रजा के कल्याण के लिए उनसे बलि ग्रहण करता था।