निर्देश: नीचे एक अनुच्छेद दिया गया है जिसमें पाँच रिक्त स्थान हैं साथ ही पाँच प्रश्न दिए गए हैं। आपको प्रत्येक प्रश्न का उत्तर उपयुक्त विकल्प द्वारा देना है जो रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त हों।
यदि श्वास-प्रश्वास की गति नियमित की जाए, तो ___________(1) के सारे परमाणु एक ही दिशा में गतिशील होने का प्रयत्न करेंगे। जब विभिन्न दिशाओं में दौड़ने वाला मन एकमुखी होकर एक दृढ़ इच्छा-शक्ति के रूप में ________(2) होता है, तब सारे स्नायु-प्रवाह भी परिवर्तित होकर एक प्रकार की विद्युद्वत गति प्राप्त करते हैं; क्योंकि स्नायुओं पर विद्युत-क्रिया करने पर देखा गया है कि उनके दोनों प्रांतों में धनात्मक और ऋणात्मक, इन विपरीत शक्तिद्वय का __________(3) होता है। इसी से यह स्पष्ट है कि जब इच्छा-शक्ति स्नायु-प्रवाह के रूप में परिणत होती है, तब वह एक प्रकार के विद्युत का आकार धारण कर लेती है। जब शरीर की सारी गतियाँ सम्पूर्ण रूप से एकाभिमुखी होती हैं, तब वह शरीर मानो इच्छा-शक्ति का एक __________(4) विद्युदाधार बन जाता है। यह प्रबल इच्छा-शक्ति प्राप्त करना ही योगी का उद्देश्य है। इस तरह, शरीरशास्त्र की सहायता से प्राणायाम-क्रिया की व्याख्या की जा सकती है। वह शरीर के भीतर एक प्रकार की एकमुखी गति पैदा कर देती है और श्वास-प्रश्वास-केंद्र पर आधिपत्य करके शरीर के अन्यान्य केंद्रों को भी वश में लाने में सहायता पहुँचाती है। यहाँ पर प्राणायाम का लक्ष्य मूलाधार के कुण्डलाकार में ____________(5) कुण्डलिनी-शक्ति को उद्बुद्ध करना है।