निम्नलिखित कथन “आज से तुम हिरण्मयी हुई। तुम खरे सोने के समान हो। उस पर कभी भी किसी प्रकार का मैल नहीं जम सकता।” किस पात्र ने किसके लिए कहा?

1
केदारनाथ ने शरतचंद्र के लिए
2
मोतीलाल ने भुवन मोहिनी के लिए
3
शरतचंद्र ने मोक्षदा (हिरण्यमयी देवी) के लिए
4
शरतचंद्र ने शांति के लिए

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