"मैं हूँ जरा नामक व्याध
और रूपान्तर यह हुआ मेरे माध्यम से
मैंने सुने हैं ये अन्तिम वचन
मरणासन्न ईश्वर के
जिसको मैं दोनों बाँहें उठाकर दोहराता हूँ"
उपर्युक्त पंक्तियाँ 'अंधा युग' नाटक के किस पात्र की है?
1
युयुत्सु
2
वृद्ध
3
अश्वथामा
4
संजय
"मैं हूँ जरा नामक व्याध
और रूपान्तर यह हुआ मेरे माध्यम से
मैंने सुने हैं ये अन्तिम वचन
मरणासन्न ईश्वर के
जिसको मैं दोनों बाँहें उठाकर दोहराता हूँ"
उपर्युक्त पंक्तियाँ 'अंधा युग' नाटक के किस पात्र की है?