अस्तित्ववाद के प्रमुख विद्वानों और साहित्यिक प्रभाव से संबंधित निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
(A) कीर्केगार्ड और बूबर ने आस्थावादी अस्तित्ववाद को ईश्वर से जोड़कर विकसित किया।
(B) नीत्शे, सार्त्र, और कामू अनास्थावादी अस्तित्ववादी थे, जिन्होंने ईश्वर के अस्तित्व को खारिज किया।
(C) अस्तित्ववाद का प्रभाव हिंदी साहित्य में इलाचंद्र जोशी, जैनेंद्र, और अज्ञेय के लेखन में देखा जाता है।
(D) सार्त्र को अस्तित्ववाद का प्रणेता माना जाता है और उन्होंने इस दर्शन को प्रथम विश्वयुद्ध से पहले विकसित किया।
(E) अस्तित्ववाद का प्रभाव केवल साहित्य तक सीमित रहा और रंगमंच या कला पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए-
अस्तित्ववाद के प्रमुख विद्वानों और साहित्यिक प्रभाव से संबंधित निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
(A) कीर्केगार्ड और बूबर ने आस्थावादी अस्तित्ववाद को ईश्वर से जोड़कर विकसित किया।
(B) नीत्शे, सार्त्र, और कामू अनास्थावादी अस्तित्ववादी थे, जिन्होंने ईश्वर के अस्तित्व को खारिज किया।
(C) अस्तित्ववाद का प्रभाव हिंदी साहित्य में इलाचंद्र जोशी, जैनेंद्र, और अज्ञेय के लेखन में देखा जाता है।
(D) सार्त्र को अस्तित्ववाद का प्रणेता माना जाता है और उन्होंने इस दर्शन को प्रथम विश्वयुद्ध से पहले विकसित किया।
(E) अस्तित्ववाद का प्रभाव केवल साहित्य तक सीमित रहा और रंगमंच या कला पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए-
1
केवल (A), (C), (D)
2
केवल (B), (E)
3
केवल (A), (B), (C)
4
केवल (D), (E)