Comprehension Passage

नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिए।

लोक संस्कृति में हमारी धरोहर छिपी है, यह हमारा इतिहास है। अपनी सीमाओं में इसका संरक्षण करना कलाकारों का ही नहीं सभी का धर्म है। हमारे देश में नाना प्रकार की कलाएँ है जो एक-दूसरे की पूरक हैं। आज कुछ स्वार्थी तत्व संस्कृति को बाजार की बिकने वाली वस्तु समझने लगे हैं। एक समय वह था, जब रेडियो के माध्यम से गाँवों में पंडवानी खूब सुनी जाती थी। आकाशवाणी ने इस दौर में लोक कलाओं के लिए बहुत काम किया। उस समय के अधिकारियों ने कलाकारों की कठिनाइयों को समझते हुए अपनी संवेदनशीलता का परिचय अनेक बार दिया। अब समय बदल गया है। रेडियो कम सुना जाने लगा है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन का जोर अधिक है। बाजार की प्रवृत्ति लोक संस्कृति पर हावी होती जा रही है। हमारे लोक कला माध्यमों ने समाज की समस्याओं के समाधान के क्षेत्र में भी काम किया है। राजनैतिक विसंगतियों पर गहरा कटाक्ष किया है। लोक कला हमें हौसला देती है, यह उसकी आन्तरिक शक्ति है।

'बाजार की बिकने वाली वस्तु' से क्या अभिप्राय है?

1
निकृष्ट मनोरंजन की वस्तु
2
साप्ताहिक बाजारों की वस्तु
3
मेलों में होने वाले प्रदर्शन
4
प्रदर्शनी में लगाई गई वस्तु

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation