“आये जोग सिखावन पाँडे x x x x x x x x

सूरदास तीनों नहिं उपजत धनिया, धान, कुम्हाँडे ।"

इस पद में 'तीनों' का व्यंग्यार्थ है

1
धनिया, धान, कुम्हाँडा
2
प्रेमाभक्ति साधना, निर्गुण की साधना, योग साधना
3
भक्ति, प्रकृति, ज्ञान
4
कृषि उपज, हृदय के भाव, साधना

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