"ज्ञात से अज्ञात की ओर जाने का कार्यक्रम बना डालो, डरो नहीं। ज्ञात से अज्ञात की ओर जाने से ही ज्ञान की विवशताएं टूटती रहेंगी, लेकिन जिस दीन से आप केवल ज्ञात की ओर जायेगें उस दीन से आप केवल अपनी ही कील पर अपने ही आसपास घूमते रहेंगे। यह अच्छा नहीं है।"
उपर्युक्त कथन किस रचना का है?
1
संस्कृति के चार अध्याय
2
कविता क्या है?
3
एक साहित्यिक की डायरी
4
अरे यायावर रहेगा याद?