Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल
"मनुष्य को जलन उस मौके पर हुआ करती है जब वह आप उस लायक न हो परंतु तुम को जो बड़ाई बड़े परिश्रम से मिली है वह ईश्वर की कृपा सै मुझ को बेमहनत मिल रही हैं। फिर मुझको जलन क्यों हो? तुम्हारी तरह खुशामद कर के मदनमोहन सै मेल किया चाहता तो मैं सहज मैं करलेता।"
उपर्युक्त कथन 'परीक्षा गुरु' उपन्यास में किसका है?
1
लाला ब्रजकिशोर
2
मास्टर शिंभूदयाल
3
लाला हरदयाल
4
बाबू बैजनाथ