'नागमती वियोग' खंड में नागमती की विरह व्यथा की अभिव्यक्ति के लिए जायसी द्वारा रचित आषाढ़ माह की पंक्तियाँ हैं :

A. धूम, साम, धौरे घाए। सेत धजा बग-पाँति देखाए।। 

B. ओनई घटा आइ चहुँ फेरी। कंत! उबारु मदन हौं घेरी।। 

C. पुष्य नखत सिर ऊपर आवा। हौं बिनु नाह, मंदिर को छावा?।। 

D. हिय हिंडोल आस डोलै मोरा। बिरह झुलाइ देइ झकझोरा।। 

E. परबत समुद अगम बिच, बीहड़ वन बनढाँख।। 

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

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