"जानत हौं हरि रूप चराचर मैं हठि नैन न लावौं।

अंजन- केस - सिखा जुवति तहँ, लोचन - सलभ पठाव ।।"

- में रेखांकित अंश से असम्बद्ध अर्थ है।

1
नेत्रों में काजल लगाए हुए
2
पर्वत शिखर से बहते अनि झरने के समान
3
सटकारे काले केश वाली
4
दीपक की ज्योति के समान कामिनी

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