Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल
"बहुत कुछ निरुद्देश्य घूम चुकने पर हम सड़क के किनारे की एक बेंच पर बैठ गए। नैनीताल की संध्या धीरे-धीरे उतर रही थी। रूई के रेशे-से भाप-से बादल हमारे सिरों को छू-छूकर बेरोक-टोक घूम रहे थे। हल्के प्रकाश और अंधियारी से रंगकर कभी वे नीले दीखते, कभी सफेद और फिर देर में अरुण पड़ जाते। वे जैसे हमारे साथ खेलना चाह रहे थे।"
उपर्युक्त कथन किस कहानी का है?
1
राही
2
आकाशदीप
3
अपना-अपना भाग्य
4
दुनिया का सबसे अनमोल रत्न