Comprehension Passage

निर्देश: निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से चुनिए -

विवाह के व्यवसाय में स्त्री की विद्या पासंग बने हुए ढेले के समान हैं, जो तुला को दोनों ओर समान रूप से गुरु कर देता है, कुछ उसके मानसिक विकास के लिए नहीं। उसकी योग्यता, उसकी कला पति के प्रदर्शन तथा गर्व की वस्तु है, उसे सत्यं शिवं सुन्दरं तक पहुँचने का साधन नहीं; उसके कोमलता, करुणा, आज्ञाकारिता, पवित्रता आदि गुण उसे पुरुष की इच्छानुकूल बनाने के लिए आवश्यक हैं, संसार पर कल्याण वर्षा के लिए नहीं। न स्त्री को अपने जीवन का कोई लक्ष्य बनाने का अधिकार है और न समाज द्वारा निर्धारित विधान के विरुद्ध कुछ कहने का। उसका जीवन पुरुष के मनोरंजन तथा उसकी वंशवृद्धि के लिए इस प्रकार चिरनिवेदित हो चुका है कि उसकी सम्मति पूछने की आवश्यकता का अनुभव भी किसी ने नहीं किया। वातावरण भी धीरे-धीरे उसे ऐसे ही मूक आज्ञा-पालन के लिए प्रस्तुत करता रहता है। गृहिणी का कर्तव्य कम महत्वपूर्ण नहीं यदि वह साधिकार और स्वेच्छा से स्वीकृत हो। जिस गृह को बचपन से उसका लक्ष्य बनाया जाता है यदि उस पर उसे अन्न-वस्त्र पाने के अतिरिक्त कोई और अधिकार भी होता, जिस पुरुष के लिए उसका जीवन एकान्त रूप से निवेदित है, यदि उसके जीवन पर उसका भी कोई स्वत्व होता तो वह दासता स्पृहणीय प्रभुता बन जाती।

उपर्युक्त अवतरण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

1
विवाह की प्रथा में वर और कन्या के माता - पिता सिर्फ उनकी भलाई का प्रयास करते हैं।
2
विवाह - प्रथा में पढ़ी-लिखी लड़की अपने मायके और ससुराल का गौरव तो बढ़ा देती है, लेकिन अपने व्यक्तित्त्व के भीतरी विकास में उसका उपयोग कर नहीं पाती है।
3
विवाह एक ऐसी प्रथा है जिसमें वर और कन्या के माता - पिता सिर्फ अपना - अपना लाभ देखते हैं।
4
विवाह की प्रथा में शिक्षित - अशिक्षित लड़की में कोई अंतर नहीं किया जाता है। दोनों को नौकरानी समझा जाता है।

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