निर्देश: निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उससे सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:
सौन्दर्य किसे कहते हैं? प्रकृति, मानव-जीवन तथा ललित कलाओं के आनन्ददायक गुण का नाम सौन्दर्य है | इस स्थापना पर आपत्ति यह की जाती है कि कला में कुरूप और असुन्दर को भी स्थान मिलता है; दुःखान्त नाटक देखकर हमें वास्तव में दुःख होता है, साहित्य में वीभत्स का भी चित्रण होता है; उसे सुन्दर कैसे कहा जा सकता है? इस आपत्ति का उत्तर यह है कि कला में कुरूप और असुन्दर विवादी स्वरों के समान हैं जो राग के रूप को निखारते हैं | वीभत्स का चित्रण देखकर हम उससे प्रेम नहीं करने लगते; हम उस कला से प्रेम करते हैं जो हमे वीभत्स से घृणा करना सिखाती है | वीभत्स से घृणा करना सुन्दर कार्य है या असुन्दर? जिसे हम कुरूप, असुन्दर और वीभत्स कहते हैं, कला में उसकी परिणति सौन्दर्य में होती है | दुःखान्त नाटकों में हम दूसरों का दुःख देखकर द्रवित होते हैं | हमारी सहानुभूति अपने तक, अथवा परिवार और मित्रों तक सीमित न रहकर एक व्यापक रूप ले लेती है | मानव-करुणा के इस प्रसार को हम सुन्दर कहेंगे या असुन्दर? सहानुभूति की इस व्यापकता से हमें प्रसत्र होना चाहिए या अप्रसत्र? दुःखान्त नाटकों अथवा करुण रस के साहित्य से हमें दुःख की अनुभूति होती है किन्तु यह दुःख अमिश्रित और निरपेक्ष नहीं होता | उस दुःख में वह आनन्द निहित होता है जो करुणा के प्रसार से हमें प्राप्त होता है | इसके सिवा इस तरह के साहित्य में हम बहुधा मनुष्य को विषम परिस्थितियों से वीरता पूर्ण संघर्ष करते हुए पाते हैं | संघर्ष का यह उदात्त भाव दुःख की अनुभूति को सीमित कर देता है | वीर मनुष्यों का यह संघर्ष हमें अपनी परिस्थितियों के प्रति सजग करता है, उनकी पराजय भी प्रबुद्ध दर्शकों तथा पाठकों के लिए चुनौती का काम करती है | उनकी वेदना हमारे लिए प्रेरणा बन जाती है | आनन्द को इस व्यापक रूप में लें, उसे इन्द्रियजन्य सुख का पर्यायवाची ही न मान लें, तो हमें करुणा और वीभत्स के चित्रण में सौन्दर्य के अभाव की प्रतीति न होगी |