"विजय तृष्णा का अंत पराभव में होता है. अलक्षेन्द्र ! राजसत्ता सुव्यवस्था से बढ़े तो बढ़ सकती है, केवल विजय से नहीं।"

यह विचार 'चन्द्रगुप्त' के किस चरित्र का है?

1
चाणक्य
2
दाण्ड्यायन
3
चन्द्रगुप्त
4
आजीवक

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