Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल
'हाय ! रुक गया यहीं संसार
बना सिंदूर अँगार !
वात हत लतिका वह सुकुमार
पड़ी है छिन्नाधार !!'
इस काव्यांश का प्रतिपाद्य है -
1
स्त्री स्वावलंबी है I
2
पुरुष के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है I
3
स्त्री के बिना पुरुष अधूरा है I
4
स्त्री - पुरुष स्वच्छंद है I