'ना नगरी काया बिधि कीन्हा |लेइ खोजा पावा, तेइ चीन्हा |
पै सुठि अगम पंथ बड बाँका | तस मारग जस सुई क नाका |
बाँक चढाव, सात खंड ऊँचा | चारि बसेरे जाइ पहुँचा |'
शुक्लजी के अनुसार उक्त पंक्तियों में प्रयुक्त 'चारि बसेरे से अभिप्राय है:
(a) चार धर्मशालाएं |
(b) प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि नामक योग के अंग |
(c) शरीअत, तरीकत, मारिफत और हकीकत नामक चार सोपान |
(d) धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष नामक पुरुषार्थ
1
(a) और (d) सही
2
(b) और (c) सही
3
(b) और (d) सही
4
(c) और (d) सही