“और अब तो हवा भी बुझ चुकी है
और सारे इश्तहार उतार लिए गए हैं
जिनमें कल आदमी -
अकाल था।"
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की हैं?

1
नागार्जुन
2
मुक्तिबोध
3
धूमिल
4
लीलाधर जगूड़ी

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