'आषाढ़ का एक दिन' "राज्याश्रय और व्यक्ति स्वातन्त्र्य के बीच भटकती हुई सर्जनात्मकता का नाट्यबिंब है।"

यह कथन किस आलोचक का है?

1
नेमिचन्द्र जैन
2
बच्चन सिंह
3
गिरीश रस्तोगी
4
जयदेव तनेजा

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