निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्न का उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनिएI
पशुत्व से मनुष्यत्व में जिस प्रकार अधिक ज्ञान - प्रसार की विशेषता है उसी प्रकार अधिक भावप्रसार की भीI पशुओं के प्रेम की पहुँच प्राय: अपने जोड़े बच्चों या खिलाने - पिलाने वालों तक ही होती हैI इसी प्रकार उनका क्रोध भी अपने सताने वालों तक ही जाता है, स्ववर्ग या पशु मात्र को सतानेवालों तक नहीं पहुँचता I पर मनुष्य में ज्ञान - प्रसार की साथ भाव - प्रसार भी क्रमश: बढ़ता गया है I अपने परिजनों, अपने संबंधियों, अपने पड़ोसियों, अपने देशवासियों क्या मनुष्य मात्र और प्राणिमात्र तक से प्रेम करने भर को जगह उसके हृदय में बन गई है I मनुष्य की त्योरी मनुष्य को ही सतानेवाले पर नही चढ़ती, गाय - बैल और कुत्ते - बिल्ली को सताने वाले पर भी चढ़ती हैI पशु की वेदना देखकर भी उसके नेत्र सजल होते हैं I बंदर को शायद बंदरिया के मुँह में ही सौंदर्य दिखायी पड़ता होगा; पर मनुष्य पशु - पक्षी, फूल - पत्ते और रेत - पत्थर में भी सौन्दर्य पाकर मुग्ध होता है I इस हृदय - प्रसार का स्मारक - स्तंभ काव्य है जिसकी उत्तेजना से हमारे जीवन में एक नया जीवन आ जाता हैI