निम्नलिखित अवतरण ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्नो के उत्तर दिए गए विकल्पों से चुनिए।
विवाह से पुरुष को तो कुछ छोड़ना नहीं होता और न उनकी परिस्थितियों में कोई अन्तर ही आता है, परन्तु इसके विपरीत स्त्री के लिए विवाह मानो एक परिचित संसार छोड़ कर नवीन संसार में जाना है, जहाँ उसका जीवन सर्वथा नवीन होगा। पुरुष के मित्र, उसकी जीवनचर्या, उसके कर्तव्य सब पहले जैसे ही रहते है वह अनुदार न होने पर भी शिक्षिता पत्नी के परिचित मित्रों, अध्ययन तथा अन्य परिचित दैनिक कार्यों के अभाव को नहीं देख पाता। साधारण परिस्थिति होने पर भी घर में इतर कार्यों से स्त्री को अवकाश रहता है, संयुक्त कुटुम्ब न होने से बड़े परिवार के प्रबन्ध की उलझनें भी नहीं घेरे रहती, उसके लिए पुरुष मित्र वर्ज्य है, और उसे मित्र बनाने के लिए शिक्षिता स्त्रियाँ कम मिलती है, अतः एक विचित्र अभाव का उसे बोध होने लगता है। कभी-कभी पति के, आने-जाने जैसी छोटी बातों में, बाधा देने पर वह विरक्त भी हो उठती है। अच्छी गृहिणी कहलाने के लिए उसे केवल पति की इच्छा के अनुसार कार्य करने तथा मित्रों और कर्तव्यों से अवकाश के समय उसे प्रसन्न रखने के अतिरिक्त और विशेष कुछ नहीं करना होता, परन्तु यह छोटा-सा कर्तव्य उसके महान अभाव को नहीं भर पाता।