जयशंकर प्रसाद के नाटक 'चन्द्रगुप्त' में चाणक्य के संवाद हैं:
A. शत्रु की उचित प्रशंसा करना मनुष्य का धर्म है।
B. भाषा ठीक करने से पहले मैं मनुष्यों को ठीक करना चाहता हूँ।
C. अन्य देश मनुष्यों की जन्मभूमि हैं, यह भारत मानवता की जन्म भूमि है।
D. महत्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में रहता है।
E. ईश्वर ने सब मनुष्यों को स्वतंत्र उत्पन्न किया है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिएः
1
केवल A, B और C
2
केवल B, C और E
3
केवल B, D और E
4
केवल C, D और E