Comprehension Passage
दक्षिण की ओर से जो भक्तिधारा आई, उसने उत्तर भारत को पूरी तरह प्रभावित किया। रामानन्द दक्षिण से भक्ति का बीज लेकर आए जो उत्तर भारत में आकर वृक्ष बन गया। नाथों और संतों की काव्यधारा से विकसित होने वाले ज्ञान और मुस्लिम एकेश्वरवाद से प्राप्त होने वाले प्रेम से निर्गुण ईश्वर को पाने का स्वप्न कबीर, जायसी ने देखा वहीं तुलसीदास और सूरदास ने राम और कृष्ण के सगुण रूप की उपासना की। सभी धाराओं के केन्द्र में लोकभाषा ने सदा स्थान बनाए रखा। अवधी, ब्रज, सधुक्कड़ी के साथ दक्षिण भारत की ओर देखें तो अनेक सूफी संतों ने दक्खिनी में विपुल साहित्य लिखा शाह मीराजी, शाह बुरहानुद्दीन द्वारा दक्खिनी में लिखित काव्य को आगे चलकर खड़ी बोली का ही एक रूप माना गया। हिंदी को देश भर में प्रचलित करने का कार्य वैष्णव धर्म ने किया। रामानन्द एवं वल्लभाचार्य ने हिंदी के माध्यम से ही भक्ति आन्दोलन को सशक्त बनाया। साहित्य एवं संगीत की दृष्टि से भी हिंदी समृद्ध भाषा है। समान उद्गम स्रोत वाली भाषाओं, मराठी, गुजराती, बंगाली, उड़िया से समानता के कारण भी हिंदी को प्रोत्साहन मिला। मुगलकाल में व्यापार केन्द्र उत्तर भारत में रहे। हिंदीतर प्रदेशों के व्यापारी भी लेनदेन के लिए हिंदी का प्रयोग करते थे। राजनैतिक कारणों से भी हिंदी को इस काल में पर्याप्त प्रोत्साहन प्राप्त हुआ।
उपर्युक्त अनुच्छेद में हिंदी से समान उद्गम के संदर्भ में किन भाषाओं का उल्लेख किया गया है?
1
मराठी, गुजराती, उड़िया एवं दक्खिनी
2
दक्खिनी, अवधी, गुजराती एवं मराठी
3
गुजराती, बंगाली एवं उड़िया
4
गुजराती, उड़िया एवं अवधी