निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मेरे विचार से कोई भी मनुष्य जिसमें जरा सी भी विवेक शक्ति है, वह अपने वातावरण को तार्किक रूप से समझना चहेगा। दुर्भाग्य की बात है कि बजाय इसके हम अपने पुराने विद्वानों एवं विचारकों के अनुभवों तथा विचारों का भविष्य में अज्ञानता के विरूद्ध लड़ाई का आधार बनाएं और इस रहस्यमय प्रश्न को हल करने की कोशिश करें, हम आलसियों की तरह, जो कि हम सिद्ध हो चुके हैं, विश्वास की उनके कथन में अविचल एवं संशयहीन विश्वास की चीख - पुकार मचाते रहते हैं। इस प्रकार मानवता के विकास को जड़ बनाने के अपराधी हैं।
प्रत्येक मनुष्य को, जो विकास के लिए खड़ा है, रूढिगत विश्वासों के हर पहलू की आलोचना तथा उनपर अविश्वास करना होगा और चुनौती देनी होगी। प्रत्येक प्रचलित मत की हर बात को हर कोने से तर्क की कसौटी पर कसना होगा। यदि काफी तर्क के बाद भी वह किसी सिद्धांत अथवा दर्शन के प्रति प्रेरित होता है, तो उसके विश्वास का स्वागत है। इसका तर्क असत्य भ्रमित या छलावा और कभी - कभी मिथ्या हो सकता है लेकिन उसको सुधारा जा सकता है, क्योंकि विवेक उसके जीवन का दिशा सूचक है। पर निरा विश्वास और अंधविश्वास खतरनाक है। यह मस्तिष्क को मूढ़ तथा मनुष्य को प्रतिक्रियावादी बना देता है। जो मनुष्य अपने को यथार्थवादी होने का दावा करता है, उसे सभी प्राचीन विश्वासों को चुनौती देनी होगी। यदि वे तर्क का प्रहार न सह सकें तो टुकड़े - टुकड़े होकर गिर पड़ेंगे। तब उस व्यक्ति का पहला काम होगा, तमाम पुराने विश्वासों को धाराशायी करके नए दर्शन की स्थापना के लिए जगह साफ़ करना। यह तो नकारात्मक पक्ष हुआ। इसके बाद सही कार्य शुरू होगा, जिसमें पुनर्निर्माण के लिये पुराने विश्वासों की कुछ बातों का प्रयोग किया जा सकता है।