"जिस जाति की सामाजिक अवस्था जैसी होती है उसका साहित्य भी ठीक वैसा ही होता है। जातियों की क्षमता और सजीवता यदि कहीं प्रत्यक्ष देखने को मिल सकती है तो उनके साहित्य रूपी आईने ही में मिल सकती है।" यह कथन किस लेखक का है ?

1
महावीर प्रसाद द्विवेदी
2
रामचंद्र शुक्ल
3
श्याम सुंदर दास
4
प्रेमचंद

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