Comprehension Passage

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

साहित्य के उपासक अपने पैर के नीचे की मिट्टी की उपेक्षा नहीं कर सकते। हम सारे बाह्य जगत को असुन्दर छोड़कर सौंदर्य की सृष्टि नहीं कर सकते। सुंदरता सामंजस्य का नाम है। जिस दुनिया में छोटाई और बड़ाई में, धनी और निर्धन में, ज्ञानी और अज्ञानी में आकाश-पाताल का अंतर हो, वह दुनिया बाह्य सामंजस्यमय नहीं कही जा सकती और इसलिए वह सुन्दर भी नहीं है। इस बाह्य असुन्दरता के 'ढूह' में खड़े होकर आन्तरिक सौन्दर्य की उपासना नहीं हो सकती। हमें उस बाह्य असौन्दर्य को देखना ही पड़ेगा। निरन्न, निर्वसन जनता के बीच खड़े आप परियों के सौन्दर्य-लोक की कल्पना नहीं कर सकते। साहित्य सुन्दर का उपासक है, इसलिए साहित्यिक असामंजस्य को दूर करने का प्रयत्न पहले करना होगा, अशिक्षा और कुशिक्षा से लड़ना होगा, भय और ग्लानि से लड़ना होगा। सौन्दर्य और असौन्दर्य का कोई समझौता नहीं हो सकता। सत्य अपना पूरा मूल्य चाहता है।

उपर्युक्त अवतरण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सी बात सही है?

1
हमारे देश का अंतर्बाह्य अत्यंत प्रीतिकर है।
2
हमारा देश इसलिए महान है कि वह अन्दर-बाहर से प्रीतिकर है।
3
आँख और कान को अच्छा न लगने के बावजूद बौद्धिक दृष्टि से हमारा देश प्रीतिकर है।
4
आतंरिक दृष्टि से हमारा देश प्रोज्ज्वल है, किन्तु बाह्य रूप से अप्रीतिकर है।

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