चौसरिया के खेल में रे, जुग्ग मिलन की आस।

नर्द अकेली रह गयी रे, नहिं जीवन की आस हो।।"

- कबीर की इस पंक्ति में 'नर्द' शब्द का अर्थ है : 

1
नंद
2
आत्मा 
3
गोटी 
4
खिलाड़ी

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