''तुलसी की विलक्षण प्रतिभा इस बात में है कि उन्होंने भक्त और रचनाकार की भूमिकाओं का एक साथ सफल निर्वाह किया है। भक्त मूलत: दैवी शक्ति के किसी स्वरूप में आस्था रखता है जबकि रचनाकार अपनी आस्तिकता-नास्तिकता के बाद एक मूलत: ऐहिक या कि धर्मनिरपेक्ष कर्म में प्रवृत्त होता है। ''

तुलदीदास के विषय में उपर्युक्त कथन किस साहित्येतिहासकार का है?

1
रामस्वरूप चतुर्वेदी
2
रामशंकर शुक्ल रसाल
3
गणपति चन्द्र गुप्त
4
हजारी प्रसाद द्विवेदी

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