"युगों के अनवरत प्रवाह में बड़े - बड़े साम्राज्य बह गए संस्कृतियाँ लुप्त हो गयी जातियाँ मिट गयी, संसार में अनेक असंभव परिवर्तन संभव हो गए, परन्तु भारतीय स्त्रियों के ललाट में विधि की बज्रलेखनी से अंकित अदृष्ट लिपि नहीं धुल सकी।"
उपर्युक्त पंक्तियों के रचनाकार हैं-
1
सुभद्राकुमारी चौहान
2
महादेवी वर्मा
3
हजारी प्रसाद द्विवेदी
4
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र