“जैसे पुराना चावल ही बड़े आदमियों के खाने योग्य समझाा जाता है वैसे ही अपने समय से कुछ पुरानी पड़ी हुई परम्परा के गौरव से युक्त भाषा से कुछ अलग बहुत दिनों तक आदिकाल के अंत क्या उसके कुछ पीछे तक - पोथियों में चलती रही।'
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राहुल सांकृत्यायन
2
रामचन्द्र शुक्ल
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हजारी प्रसाद द्विवेदी
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नामवर सिंह