मुक्तिबोध ने साहित्य की हर विधा को इतना तोड़ दिया है कि रचना स्वयं अपने मूल्यों को ललकारने लगती है, कविता बढ़ते बढ़ते डायरी हो जाती है और डायरी चलते चलते कहानी हो जाती है।"

मुक्तिबोध के रचना शिल्प के बारे में यह कथन किस साहित्यकार का है? 

1
अशोक वाजपेयी
2
नेमिचन्द्र जैन
3
शमशेर बहादुर सिंह
4
श्रीकांत वर्मा

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