'मैं कहता हौं आँखिन देखी, तू कहता कागद की लेखी।'

इस काव्य पंक्ति का आशय है:

1
प्रत्यक्ष ज्ञान और पुस्तकीय ज्ञान एक ही है।
2
प्रत्यक्ष ज्ञान को ही पुस्तकों में लिखा जाता है।
3
प्रत्यक्ष ज्ञान पुस्तकीय ज्ञान से हीन है।
4
स्वानुभव शास्त्रीय ज्ञान से बड़ा है।

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