"सुंदरता का आलोकस्त्रोत है फूट पड़ा मेरे मन में I

जिससे नवजीवन का प्रभात होगा फिर जग की आँगन में II"

उपर्युक्त पंक्तियों के रचयिता हैं -

1
जयशंकर प्रसाद 
2
सुमित्रानंदन पंत 
3
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 
4
महादेवी वर्मा 

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