जिमि लोण विलिज्जइ पाणिएहि तिम घरिणी लइ चित्त।
समरस जाई तक्खणे जइ पुणु ते सम णिन्त।
इन काव्य - पंक्तियों के रचनाकार सिद्ध कवि हैं -
1
कण्हपा
2
कमरिपा
3
सरहपा
4
डोम्बिपा
जिमि लोण विलिज्जइ पाणिएहि तिम घरिणी लइ चित्त।
समरस जाई तक्खणे जइ पुणु ते सम णिन्त।
इन काव्य - पंक्तियों के रचनाकार सिद्ध कवि हैं -